बटुआ अम्मा का था और यादें हमारी "The wallet belonged to mother but the memories are ours. A Heart Touching story in Hindi

दोस्तों आज मैं आपके लिए एक दिल को छु जाने वाली कहानी को लेकर हाजिर हुआ हूँ, आशा करते हैं की आप इसे पढेंगे और अपना फीडबैक देंगे...



अम्मा का बटुआ !

अम्मा जब से गईं,

तब से इस बटुए से भी दूर हो गए 

        बचपन में जब गली में बर्फ का 

        गोला वाले अंकल आते या घंटी 

        बजाकर कुल्फी वाले आते तो,

        यही बटुआ तो सहारा था ......

अम्मा के इस जादुई पर्स में सिक्के कुछ ही रहते थें कई बार कुछ मुड़े मैले नोट भी होते

हमारे लिए दुनिया का सबसे अमीर बटुआ या पर्स यही था

          सोचते कि बड़े होने का मतलब ये पर्स रखना भी है 

           बड़े हो जायेंगे तो ऐसा ही बटुआ रखेंगे अम्मा जैसा बटुआ रखकर अम्मा जैसे बनेंगे ....

जब अम्मा नहीं तो सब बदल गया

चौका चूल्हा, मसालदानी के मसाले, 

चाय की मलाई, आँगन, इंतजार करती वो आँखे ...

        तुरपाई अक्सर सब सी देती है 

        काश इस खालीपन को भी सी देती 

        अम्मा मौन को समझ जाती थीं , अक्सर बोलतीं --

        ले पैसे - लेकिन किसी को बताना मत ...

आज तक किसी को बताया भी नहीं

मगर कितना उधार चढ़ गया 

इस उधार को उतारने का सुख भी अम्मा के साथ ही चला गया ..

            अम्मा के मामले में उधार शब्द सही नहीं . पर अब अम्मा का बटुआ तो है नहीं,

             जो जरूरतों को पूरा करने के लिए कुछ निकाल कर दे दें

            ये बटुआ याद आता है तो अम्मा की धँसी हुईं आँखे, 

            रूई हो चुके हाथ, झुर्रियां, खाल की सिलवटें, सब याद आता है ...

कबूतर अब माकन के अंदर नहीं आते चरों तरफ जाली लगा दी है मगर जिसके पास दरवाजे से कोई नहीं आता, उससे मिलने बालकनी से कौन आएगा ?

हाँ पर यादें आती हैं। अम्मा का बटुआ चला गया, पर यादों का बटुआ कहीं नहीं जाता ..

जब भी खुलता है तो सिक्के नहीं निकलते, अम्मा की यादें निकलती है

...

..

दोस्तों मुझे उम्मीद है कि आपको यह कहानी पसंद आई होगी। 

Thanking you.. 

CEO, NewVocab.in



Post a Comment

0 Comments